Wednesday, November 27, 2019

Firaq gorakhpuri biography

Biography of Firaq Gorakhpuri in Hindi:


Firaq Gorakhpuri Biography
Firaq Gorakhpuri Biography

  • फ़िराक़ गोरखपुरी जीवन परिचय:

फ़िराक़ गोरखपुरी का जन्म 28 अगस्त 1896 को गोरखपुर में हुआ था.फ़िराक़ का असली नाम रघुपति सहाय है.उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कायस्थ परिवार में हुआ था जो कि गोरखपुर में रहता था. 

फ़िराक़ के पिता वैसे तो वकील थे लेकिन उन्हें शायरी का भी शौक था और वो भी कविताएं लिखा करते थे.

शायद इसलिए फ़िराक़ में भी अपने पिता से ही ये गुड आये होंगे और उन्होंने भी शायरी लिखना शुरू किया होगा.उनका बचपन भी साहित्यिक माहौल में गुज़रा था.



फ़िराक़ के पिता का नाम गोरख प्रसाद 'इबरत' था.उन्होंने भी कई रचनाएँ की जो कि बहुत प्रसिद्ध हुई.


गोरख प्रसाद ने 'हुस्ने फितरत', 'नशो नुमाय हिंद', 'हाली', 'आजाद' जैसी कई नज़्म लिखीं, जो की आगे चलकर काफी प्रचलित हुई.

फ़िराक नेहरू जी के अच्छे दोस्त थे और नेहरू जी ने उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस के दफ्तर में अवर सचिव की जगह दिलाई थी.उनके पिता की मृत्यु के पश्चात उनके घर की सारी ज़िम्मेदारियों का बोझ उन पर ही आ गया था. नेहरू जी इन सब मजबूरियों को समझते थे इसीलिए उन्होंने उन्हें सचिव का पद दिलाया था.


इस आर्थिक मंदी के कारण फिराक़ को 'लक्ष्मी भवन' बेचना पड़ा था,जहां पर वे रहते थे.उन्होंने इसे बेचकर अपने सारे कर्ज़े उतार दिए.

  •  शिक्षा:

शुरूआती शिक्षा के बाद इनको अरबी,फ़ारसी और अंग्रेजी का अध्ययन कराया गया.कायस्थ परिवार से होने के कारण उर्दू उनको विरासत में मिली थी.

फ़िराक़ का स्नातक की परीक्षा में पूरे प्रदेश में चौथा स्थान आया था. वे बचपन से ही बहुत प्रतिभावान थे.इसके बाद उनका सलेक्शन I.C.S में हो गया.


  • विवाह :

फिराक़ जी का विवाह 29 जून 1914 को प्रसिद्द जमींदार विन्देश्वरी प्रसाद की बेटी  से से हुआ था.जिनका नाम किशोरी देवी था.

  • फिराक गोरखपुरी के किस्से:

एक बार उन्होंने महात्मा गांधी का स्वतंत्रता का भाषण सुना और अपनी नौकरी छोड़ दी और इस आंदोलन में शामिल हो गए.

इस कारण से उनको लगभग डेढ़ साल की जेल की सजा भी काटनी पड़ी.

फ़िराक़ साहब बहुत ही स्वाभिमानी थे.एक बार इंदिरा गांधी ने राज्य सभा में जाने का प्रस्ताव दिया.


फिराक़ लाल क़िले में होने वाले मुशायरे में भाग लेने के लिए गए हुए थे तब इंदिरा गांधी ने उन्हें अपने आवास पर बुलाकर ये प्रस्ताव उनके सामने रखा.लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया.

उन्होंने इंदिरा जी से कहा: आनंद भवन से मेरे रिश्ते मोती लाल जी के समय से ही बहुत गहरे है, अपने मुझे इस योग्य समझा और इतना सम्मान दिया मेरे लिए यही बड़ी बात है,आपने मेरे लिए इतना सोचा,यही मेरे लिए राज्य सभा सदस्य बनने जैसा है.आप इसी तरह मेरा ख़याल करती रहे मैं इसी में खुश हूँ.



  •  फ़िराक़ का व्यक्तित्व:


फ़िराक़ का व्यक्तित्व बहुत ही जटिल था उनको समझना आसान नहीं था हर कोई उनको नही समझ सकता था.फिराक़ को जानने का दावा तो बहुत लोग करते है लेकिन उन्हें जानने वालों की अभी भी बहुत कमी है.

वे हमेशा बातों को बढ़ा चढ़ा कर कहते थे,अपने दुखो को भी बहुत बढ़ा चढ़ा कर बताते थे.वे अपना मज़ाक खुद ही बनाते थे और अपने आप पर ही चुटकुले कहते थे और उनको प्रसारित करते थे.

उनके यहाँ उनके द्वारा ही फैलाए गए बहुत सारे चुटकुले प्रमुख हो गए थे,लेकिन वो बहुत ही स्वाभिमानी भी थे.


उनका पहनावा हमेशा ही बेढंगा होता था.ढीली-वाली शेरवानी पहनते थे और उसके बटन भी ढीले-ढाले और खुले रहते थे,टोपी से बाल बहार दिखाई देते रहते थे.

पैजामा, लटकता हुआ इजारबंद, एक हाथ में सिगरेट और दूसरे में घड़ी, गहरी-गहरी और गोल-गोल- डस लेने वाली-सी आंखों में उनके व्यक्तित्व का फक्कड़पन खूब जाहिर होता था।


लेकिन वो अपने समय के महान शायर थे.इस बात का पता उनकी शायरी से चलता है.


जाओ न तुम हमारी इस बेखबरी पर कि हमारे

हर ख्‍़वाब से इक अह्‌द की बुनियाद पड़ी है।


  • साहित्यिक जीवन:

फिराक़ को बचपन से रामायण के किस्से,सूरदास और मीरा के लिखे हुए काव्य बहुत पसंद थे.

उन्होंने अपना साहित्यिक जीवन ग़ज़ल से शुरू किया था.फ़िराक़ के आने से पहले साहित्य शास्त्रीयता से बंधा हुआ था.साथ ही उसमें रूमानियत और रहस्यवाद का बहुत असर था.फ़िराक़ ने अपनी शायरी से इस रिवाज को तोड़ा और साहित्य को लोकजीवन और प्रकृति की तरफ ले गए.


फ़िराक़ से पहले भी कुछ शायरों ने दिशा में कदम बढ़ाया था जिनमे से नजीर अकबराबादी,अल्ताफ हुसैन हाली जैसे शायरों के नाम प्रमुख है.


फ़िराक़ ने परंपरागत तरीको और उन्ही शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसमें नयी भाषा और विषयों को शामिल किया.


फ़िराक़ ने समाज के दुःख दर्द को अपनी शायरी में जगह दी.उन्हें भाषाओं का अच्छा ज्ञान था इस कारण वे अपनी शायरी में दैनिक जीवन की सच्चाई को आसान शब्दों में व्यक्त कर पाए.

  • व्यवसाय:


  • कवि
  • लेखक 
  • आलोचक 

इसके अलावा भी फिराक़ जी ने अलग अलग पदों पर कार्य किया.

फिराक़ जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस के दफ्तर में अवर सचिव के पद पर काम किया बाद में जब नेहरू जी यूरोप चले गए तब उन्होंने इस पद को छोड़ दिया.

अपनी आर्थिक मंदी के दौर में फ़िराक़ ने सेंट जांस कॉलेज आगरा में भी  पढ़ाया था.लेकिन कुछ समय बाद वे इलाहाबाद आ गए और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग में बतौर प्रवक्ता के तौर पर पढ़ाना शुरू कर दिया.वहां पर वे १९३० से लेकर १९५९ तक अंग्रेजी के अध्यापक रहे.


इसी समय उन्होंने अपनी पहचान एक लेखक के रूप में बनानी शुरू कर दी थी.

वो एक बहुत विद्वान् और एक महान शायर थे जिसकी शायरी आज भी लोगो के दिलों में बसी हुई है.उन्होंने बहुत ही उम्दा शायरी,कविताएं,ग़ज़लें,और नज़्में हमें दी है.


1970 में फ़िराक़ को साहित्य अकादमी का सदस्य भी मनोनीत किया गया था.


  • रचनायें:

फ़िराक़ आज हमारे बीच में नहीं है लेकिन उनकी शायरी आज भी लोगों के दिलों में जिन्दा है।  फारसी, हिंदी, ब्रजभाषा और भारतीय संस्कृति की गहरी समझ के कारण उनकी शायरी में भारत की मूल पहचान रच-बस गई है। उनकी कुछ कविताएं,शायरी और ग़ज़ल इस प्रकार है......



  • फ़िराक़ गोरखपुरी नज़्म: 


हिंडोला, 
जुगनू, 
नकूश, 
आधीरात, 
परछाइयाँ और तरान-ए-इश्क

  • फ़िराक़ गोरखपुरी कविता कोश:

फ़िराक़ गोरखपुरी का कविता कोश बहुत ही बड़ा है.उन्होंने अलग-अलग बाषाओ में अलग-अलग रचनाये की है जो की निचे दी गयी है...


  • फ़िराक़ गोरखपुरी शायरी:

फिराक गोरखपुरी की शायरी में गुल-ए-नगमा, मश्अल,धरती की करवट, गुलबाग, रम्ज व कायनात, चिरागां, रूप, शोअला व साज, हजार दास्तान, बज्मे जिन्दगी रंगे शायरी,रूह-ए-कायनात, नग्म-ए-साज, ग़ज़लिस्तान, शेरिस्तान, शबनमिस्तान, आदि शामिल है.

  • फ़िराक़ गोरखपुरी पुस्तकें:

फ़िराक़ ने जो पुस्तकें लिखी है उनके नाम इस प्रकार है.


  • Firaq Gorakhpuri Book List
  • Anaar kali-1945
  • andaze-1956
  • andaze-1959
  • batein firaq se-1998
  • charaghan-1966
  • dharti ki karwat-1966
  • ek sau ek janm-1962
  • firaq:sadi ki awaz-1996
  • firaq:sadi ki awaz-2000
  • firaq aur nayi nasl-1997
  • firaq gorakhpuri-1972
  • firaq gorakhpuri-1984
  • firaq gorakhpuri-1967
  • firaq gorakhpuri1991
  • firaq gorakhpuri-2006
  • firaq gorakhpuri: fun aur shakhsiyat-1986


फिराक़ जी की और बुक्स यहाँ से पढ़ सकते है.
Click Here

  • फिराक गोरखपुरी की रुबाइयाँ:

फिरफ की रुबाइयों में सत्यम् शिवम् सुन्दरम्  प्रमुख है.


  • फ़िराक़ गोरखपुरी उपन्यास:

फ़िराक़ ने एक उपन्यास साधु और कुटिया लिखा और कई कहानियाँ भी लिखी हैं


  • फ़िराक़ गोरखपुरी की फिल्म:

फ़िराक़ गोरखपुरी पर एक डॉक्यूमेंट्री बनायी गयी है,जो की निचे दी गयी है

A Film made by Films Division, GOI, in 1971 ... Commentary, written & spoken by Kaifi Azmi ...

Click Here to watch this on Youtube


  • पुरस्कार:

1970 में उनकी उर्दू काव्यकृति ‘गुले नग्‍़मा’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1969 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड से भी सम्मानित किया गया.

फिराक गोरखपुरी को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन 1968 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था।


  • निधन:

फ़िराक़ गोरखपुरी का निधन 3 मार्च 1982 को नयी दिल्ली में हुआ.लेकिन दिल को छू लेने वाली शायरी से वो आज भी याद किये जाते है और वो आज भी लोगो के दिलों में ज़िंदा.

साहित्य में उनकी इस अनमोल देन को हमेशा याद किया जाता रहेगा.


  • सलेक्टेड पोएट्री ऑफ फिराक गोरखपुरी:



जो बात है हद से बढ़ गयी है / फ़िराक़ गोरखपुरी
उमीदे-मर्ग कब तक / फ़िराक़ गोरखपुरी
यूँ माना ज़ि‍न्दगी है चार दिन की / फ़िराक़ गोरखपुरी
उस ज़ुल्फ़ की याद जब आने लगी / फ़िराक़ गोरखपुरी
दयारे-गै़र में सोज़े-वतन की आँच न पूछ / फ़िराक़ गोरखपुरी
कभी जब तेरी याद आ जाय है / फ़िराक़ गोरखपुरी
ख़ुदनुमा होके निहाँ छुप के नुमायाँ होना / फ़िराक़ गोरखपुरी
छिड़ गये साज़े-इश्क़ के गाने / फ़िराक़ गोरखपुरी
होकर अयाँ वो ख़ुद को छुपाये हुए-से हैं / फ़िराक़ गोरखपुरी
तुम्हीं ने बायसे-ग़म बारहा किया दरयाफ़्त / फ़िराक़ गोरखपुरी
इस सुकूते ‍फ़िज़ा में खो जाएं / फ़िराक़ गोरखपुरी
तहों में दिल के जहां कोई वारदात हुई / फ़िराक़ गोरखपुरी
मैं होशे-अनादिल हूँ मुश्किल है सँभल जाना / फ़िराक़ गोरखपुरी
तमाम कैफ़ ख़मोशी तमाम नग़्म-ए-साज़ / फ़िराक़ गोरखपुरी
निगाहें नाज़ ने पर्दे उठाए हैं / फ़िराक़ गोरखपुरी
कुछ इशारे थे जिन्हें दुनिया समझ बैठे थे हम / फ़िराक़ गोरखपुरी
रस में डूब हुआ लहराता बदन क्या कहना / फ़िराक़ गोरखपुरी
सितारों से उलझता जा रहा हूँ / फ़िराक़ गोरखपुरी
यह नर्म नर्म हवा झिलमिला रहे हैं चिराग़ / फ़िराक़ गोरखपुरी
शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो / फ़िराक़ गोरखपुरी
ये माना ज़िन्दगी है चार दिन की / फ़िराक़ गोरखपुरी
अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं / फ़िराक़ गोरखपुरी
ऐ जज्बा-ए-निहां और कोई है कि वही है / फ़िराक़ गोरखपुरी
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं / फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ैर क्या जानिये क्यों मुझको बुरा कहते हैं / फ़िराक़ गोरखपुरी
जब नज़र आप की हो गई है / फ़िराक़ गोरखपुरी
कभी पाबंदियों से छूट के भी दम घुटने लगता है / फ़िराक़ गोरखपुरी
मौत इक गीत रात गाती थी / फ़िराक़ गोरखपुरी
मुझको मारा है हर एक दर्द-ओ-दवा से पहले / फ़िराक़ गोरखपुरी
रात आधी से ज्यादा गई थी सारा आलम सोता था / फ़िराक़ गोरखपुरी
रात भी, नींद भी, कहानी भी / फ़िराक़ गोरखपुरी
सकूत-ए-शाम मिटाओ बहुत अंधेरा है / फ़िराक़ गोरखपुरी
सर में सौदा भी नहीं, दिल में तमन्ना भी नहीं / फ़िराक़ गोरखपुरी
ये निखतों की नर्म रवी, ये हवा ये रात / फ़िराक़ गोरखपुरी
ये तो नहीं कि ग़म नहीं / फ़िराक़ गोरखपुरी
थरथरी सी है आसमानों में / फ़िराक़ गोरखपुरी
कोई नई ज़मीन हो नया आसमां भी हो / फ़िराक़ गोरखपुरी
छलक के कम न हो ऐसी कोई शराब नहीं / फ़िराक़ गोरखपुरी
न जाना आज तक क्या शै ख़ुशी है / फ़िराक़ गोरखपुरी
हर जलवे से एक दरस-ए-नुमू लेता हूँ / फ़िराक़ गोरखपुरी
देखते देखते उतर भी गये / फ़िराक़ गोरखपुरी
हिंज़ाबों में भी तू नुमायूँ नुमायूँ / फ़िराक़ गोरखपुरी
किसी का यूं तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी / फ़िराक़ गोरखपुरी
रुबाईयाँ / फ़िराक़ गोरखपुरी
हमसे फ़िराक़ अकसर छुप-छुप कर / फ़िराक़ गोरखपुरी
क्यों तेरे ग़म-ए-हिज्र में / फ़िराक़ गोरखपुरी
न जाने अश्क से आँखों में क्यों है आये हुए / फ़िराक़ गोरखपुरी
जुगनू / फ़िराक़ गोरखपुरी
डरता हूँ कामयाबी-ए-तकदीर देखकर / फ़िराक़ गोरखपुरी
अब तो हम हैं / फ़िराक़ गोरखपुरी
किस तरफ़ से आ रही है / फ़िराक़ गोरखपुरी
जिससे कुछ चौंक पड़ें / फ़िराक़ गोरखपुरी
वुसअते-बेकराँ में खो जायें / फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क-बेबाक को रोके हुए है / फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क तो दुनियाँ का राजा है / फ़िराक़ गोरखपुरी
कर गई कम वो नज़र / फ़िराक़ गोरखपुरी
आह वो मंजिले-मुराद / फ़िराक़ गोरखपुरी
रुकी-रुकी-सी / फ़िराक़ गोरखपुरी
अगर बदल न दिया / फ़िराक़ गोरखपुरी
जो भूलतीं भी नहीं / फ़िराक़ गोरखपुरी
आ ही जाती है / फ़िराक़ गोरखपुरी
हुस्न का जादू जगाए / फ़िराक़ गोरखपुरी
न आना तेरा अब भी / फ़िराक़ गोरखपुरी
सोजें-पिनहाँ हो / फ़िराक़ गोरखपुरी
न पूछ क्या काम कर गई है / फ़िराक़ गोरखपुरी
फरिश्तों और देवताओं का भी / फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़िन्दगी क्या है / फ़िराक़ गोरखपुरी
खो के इक शख्स को / फ़िराक़ गोरखपुरी
हमको तुमको फेर समय का / फ़िराक़ गोरखपुरी
देखा हर एक शाख पे / फ़िराक़ गोरखपुरी
जो दिलो-जिगर में उतर गई / फ़िराक़ गोरखपुरी
अरे ख्वाबे मोहब्बत की / फ़िराक़ गोरखपुरी
आधी रात को / फ़िराक़ गोरखपुरी
धुँधलका / फ़िराक़ गोरखपुरी
कुछ ग़में-जानां,कुछ ग़में-दौरां / फ़िराक़ गोरखपुरी
दोहे / फ़िराक़ गोरखपुरी
नई हुई फिर रस्म पुरानी / फ़िराक़ गोरखपुरी

फ़िराक़ गोरखपुरी दोहे


नया घाव है प्रेम का जो चमके दिन-रात
होनहार बिरवान के चिकने-चिकने पात.

यही जगत की रीत है, यही जगत की नीत
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत.

जो न मिटे ऐसा नहीं कोई भी संजोग
होता आया है सदा मिलन के बाद वियोग.

जग के आँसू बन गए निज नयनों के नीर
अब तो अपनी पीर भी जैसे पराई पीर.

कहाँ कमर सीधी करे, कहाँ ठिकाना पाय
तेरा घर जो छोड़ दे, दर-दर ठोकर खाय.

जगत-धुदलके में वही चित्रकार कहलाय
कोहरे को जो काट कर अनुपम चित्र बनाय.

बन के पंछी जिस तरह भूल जाय निज नीड़
हम बालक सम खो गए, थी वो जीवन-भीड़.

याद तेरी एकान्त में यूँ छूती है विचार
जैसे लहर समीर की छुए गात सुकुमार.

मैंने छेड़ा था कहीं दुखते दिल का साज़
गूँज रही है आज तक दर्द भरी आवाज़.


दूर तीरथों में बसे, वो है कैसा राम
मन-मन्दिर की यात्रा,मूरख चारों धाम.

वेद,पुराण और शास्त्रों को मिली न उसकी थाह
मुझसे जो कुछ कह गई , इक बच्चे की निगाह.


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